राजस्थान की खारे पानी की झीले I saltwater-lake-in-rajasthan - SSC EXAM LIVE

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

राजस्थान की खारे पानी की झीले I saltwater-lake-in-rajasthan


राजस्थान की खारे पानी की झीले



साँभर झील-

  • · भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है और राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है
  • · सांभर झील 32 किमी लम्बी तथा 3 से 12 किमी चौड़ी है
  • · यह झील जयपुर, नागौर, अजमेर की सीमा पर स्थित है
  • · सांभर झील का अपवाह क्षेत्र 500 वर्ग किमी है तथा वर्षा ऋतु में इस झील का विस्तार 145 वर्ग किमी हो जाता है
  • · बिजौलिया शिलालेख के अनुसार चौहान शासक वासुदेव 551 ई. में करवाया है
  • · उत्तरी अक्षांश 27 डिग्री से 29 डिग्री के मध्य स्थित है तथा पूर्वी देशांतर 74 डिग्री से 75 डिग्री के मध्य स्थित है
  • · देश का 8.7 % नमक उत्पादन होता है
  • · इस झील में मेंथा नदी, रूपनगढ़ नदी , खारी नदी, खण्डेल नदी इत्यादी नदियों सहित जल सांभर झील में आकर गिरता है
  • · मुगलकाल में भी यहां नमक बनाया जाता था.
  • · केन्द्र सरकार ने 1964 में हिन्दुस्तान साल्ट कम्पनी के द्वारा सांभर साल्ट परियोजना प्रारम्भ की गई इसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार का अनुपात 60:40 है
  • · इस झील में 4 मी. गहराई तक नमक अनुमानित 350 लाख टन है
  • · इस झील की धरातलीय ऊंचाई समुद्र तल से 300-400 मी. के मध्य है पर औसत ऊँचाई 367 मी. है
  • · यहाँ नमक में स्पाईरुलीना नामक शैवाल पाया जाता है जिसमें 65 % तक प्रोटीन पाया जाता है
  • गुजरात का राज्य पक्षी राजहंस व विरह का प्रतीक कुरजां पक्षी सांभर झील में विचरण करने के लिए आते है
  •  सांभर झील पर पर्यटक विकास हेतु रामसर साइट (1990) नाम से पर्यटक स्थल विकसित किया गया
  • सांभर झील के पास शाकम्भरी माता का मंदिर बना है इसे तीर्थों का रानी अथवा देवयानी भी कहाँ जाता है
  •  यहाँ पर दो प्रकार से नमक निर्माण - 1. क्यार नमक 2. रेशता 

डीडवाना झील -

 यह नागौर जिले के डीडवाना नगर के समीप स्थित है। यह 10 वर्ग किमी में फैली है। इससे राजस्थान स्टेट साल्ट्स वर्क्स द्वारा नमक तैयार किया जाता है। यहाँ नमक का उत्पादन निजी इकाइयों द्वारा भी किया जाता है जिन्हें 'देवल' कहते हैं। इनमें नमक पुराने तरीके से बनाया जाता है। डीडवाना से 8 किमी दूर राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स डीडवाना, जिसकी स्थापना 1964 में की गई थी, द्वारा स्थापित सोडियम सल्फेट का संयंत्र भी है। यह क्षेत्र नमक उत्पादन की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ उत्पादित नमक की लागत कम आती है किन्तु यहाँ नमक में सोडियम सल्फेट की मात्रा अधिक होने की वजह से अखाद्य नमक का उत्पादन अधिक होता है जिसको बेचने में कठिनाई आती है।

पचपद्रा झील -


  • यह झील पंचपदरा, बाड़मेर में स्थित है 
  • यह लगभग 25 वर्ग किमी में फैली हुई है 
  • यह राज्य की सबसे खारी झील है 
  • यह झील वर्षा जल के ऊपर निर्भर नहीं है बल्कि नियतवाही जल स्रोतों से इसे पर्याप्त खारा जल मिलता रहता है. 
  • इस झील पर 400 वर्ष पूर्व एक पंचा नाम व्यक्ति ने इस झील के समीप आकर एक खेड़ा या पुरवा स्थापित किया. 
  • यहाँ खारवाल जाति के लोग मोरली झाड़ी के स्फटिक बनाते है 
  • इस झील के नमक में 98 % सोडियम क्लोराइड की मात्रा पाई जाती है जो खाने के लिए बहुत उपयोगी है 
  • यहाँ पर राजस्थान सरकार के राजकीय लवण स्रोत है 
  • पूर्व में 1920 खानें  थी परन्तु प्राकृतिक प्रकोपों के प्रभाव से वर्तमान में 197 खानें रह गई 
  • यह नमक सबसे उत्तम किस्म वाला है 

लूणकरणसर झील -

 यह बीकानेर के उत्तर-पूर्व में लगभग 80 किमी दूर स्थित है। इसके पानी में लवणीयता की कमी है अत: बहुत थोड़ी मात्रा में नमक बनाया जाता है। यह झील 6 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली है। 

पोकरण झील -

 यह जैसलमेर जिले में स्थित है। इससे उत्तम किस्म का नमक प्रतिवर्ष लगभग 6000 टन बनाया जाता है।

फलौदी झील -

 यह जोधपुर जिले में स्थित है जिससे प्रतिवर्ष लगभग एक लाख टन नमक तैयार किया जाता है।

कुचामन झील -

 नागौर जिले के कुचामन सिटी के परिक्षेत्र में स्थित इस झील से लगभग 12000 टन वार्षिक नमक बनाया जाता है।

सुजानगढ़ झील -

 यह झील चुरु जिले में है तथा इससे लगभग 24000 टन वार्षिक नमक बनाया जाता है। कुचामन, फलौदी व सुजानगढ़ में कुओं से भी नमक बनाया जाता है।

जाब्दीनगर -

 सांभर के निकट नागौर जिले में यह एक नया नमक स्रोत विकसित किया जा रहा है।

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