राजस्थान की मीठे पानी की झीलें - SSC EXAM LIVE

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

राजस्थान की मीठे पानी की झीलें


राजस्थान की मीठे पानी की झीलें

  1. जयसमन्द झील (ढ़ेबर झील) –  यह राजस्थान के मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है। यह उदयपुर जिले में स्थित है तथा इसका निर्माण राजा जयसिंह ने 1685-1691 ई० में गोमती नदी पर बाँध बनाकर करवाया गया था। यह बाँध 375 मी. लंबा और 35 मीटर ऊँचा है। यह झील लगभग 15 किमी लंबी और 8 किलोमीटर चौड़ी है। यह उदयपुर से 51 किमी दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसमें करीब 7 टापू हैं; जिसमें सबसे बड़ा "बाबा का भांगड़ा" व सबसे छोटा "प्यारी" जिसमें भील एंव मीणा जाति के लोग रहते हैं। इस झील से श्यामपुर तथा भाट नहरे बनाई गई हैं। इन नहरों की लंबाई क्रमश: 324 किलोमीटर और 125 किमी है। जयसमन्द झील पर "औदिया" व "प्रासाद" बने हुए है।

  2. राजसमन्द झील –  यह उदयपुर से 64 किलोमीटर दूर कांकरौली स्टेशन के पास स्थित है। यह 6.5 किलोमीटर लंबी और 3 किलोमीटर चौड़ी है। इस झील का निर्माण 1662 ई० में उदयपुर के महाराणा राजसिंह के द्वारा गोमती नदी पर कराया गया। इसका पानी पीने एंव सिचाई के काम आता है। इस झील का उत्तरी भाग "नौ चौकी की पाल" के नाम से विख्यात है , जहां संगमरमर की 25 शिला लेखों पर मेंवाड़ का इतिहास "राजप्रशस्ति" संस्कृत भाषा में अंकित है। इस प्रशस्ती का उत्कीर्ण करने का श्रेय "रणछोड़ भट्ट तेलंग" को जाता है। इस झील के तट पर श्री द्वारकाधीश का वैभवशाली मंदिर स्थित है।

  3. पिछोला झील –  यह उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध व बड़ी झील है। इसके बीच में स्थित दो टापूओं पर जगमंदिर और जगनिवास दो सुन्दर महल बने हैं। इन महलों का प्रतिबिंब झील में पड़ता है। इस झील का निर्माण राणा लाखा के शासन काल में एक बंजारे ने 14 वीं शताब्दी के अंत में करवाया था। बाद में इसे उदय सिंह ने इसे ठीक करवाया। यह झील लगभग 7 किलोमीटर चौड़ी है। यह झील उदयपुर की दूसरी प्रसिद्ध झील फ़तहसागर से जुड़ी है।
     

  4. फ़तह सागर झील -  महाराणा जय सिंह जी द्वारा निर्मित झील का पुनः निर्माण महाराणा फ़तह सिंह जी द्वारा करवाया गया था इसी कारण इस झील को फ़तह सागर झील के नाम से जाना जाता है। इस झील की आधार शिला ड्यूक ऑफ़ कनाट ने रखी थी। इस झील में एक टापू है जहाँ नेहरु गार्डन व सौर वैधशाला बनी हुई है।

  5. आनासागर झील –  1137 ई० में इस झील का निर्माण अजमेर में आना जी/ अर्णोरज के द्वारा कराया गया। यह दो पहाड़ियों के बीच में बनाई गई है तथा इसकी परिधि 12 किलोमीटर है। जहाँगीर ने यहाँ एक सुभाष उद्यान/दौलत बाग बनवाया तथा शाहजहाँ के शासन काल में यहां एक बारादरी का निर्माण हुआ। पूर्णमासी की रात को चांदनी में यह झील एक सुंदर दृश्य उपस्थित करती है।

  6. नक्की झील –  यह एक प्राकृतिक झील है तथा यह माउंट आबू, सिरोही में स्थित है। किद्वंती है कि इस झील का निर्माण देवताओं द्वारा नाखूनों  से खोदकर किया गया था। यह झील लगभग 35 मीटर गहरी है। यह झील का कुल क्षेत्रफल 9 वर्ग किलोमीटर है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों का मुख्य केन्द्र है। राजस्थान की सबसे ऊँची पर टॉड रॉक व नन रॉक प्रसिद्ध है। 

  7. फाई सागर – यह अजमेर में स्थित एक प्राकृतिक झील है। इसका निर्माण बांडी नदी पर इंजीनियर फ़ॉय के निर्देशन में हुआ था इसी कारण इसे फ़ाई सागर झील के नाम से जाना जाता है। इसका पानी आना सागर में भेज दिया जाता है क्योंकि इसमें वर्ष भर पानी रहता है।

  8. पुष्कर झील – यह अजमेर से 11 किलोमीटर दूर पुष्कर में स्थित हैं। इस झील के तीनों ओर पहाड़ियाँ है तथा इसमें सालों भर पानी भरा रहता है। यह राज्य की सबसे प्राचीन पवित्र एंव प्रकृतिक झील है। इस झील पर प्राचीन ब्रह्माजी व सावित्री जी का मंदिर बना हुआ है। इसे "हिंदुओ का पाँचवा तीर्थ" माना जाता है। यंहा कुल 52 घाट बने हुए है जिसमें गांधी घाट एतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यान प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला का आयोजन होता है।

  9. सिलीसेढ़ झील –  यह एक प्राकृतिक झील है तथा यह झील दिल्ली-जयपुर मार्ग पर अलवर से 12 किलोमीटर में स्थित है। इस झील के किनारे 1845 ई. में राजा विनय सिंह द्वारा रानी शिला के लिए शाही महलों का निर्माण करवाया गया था। 

अन्य झीलें -

  • बालसमन्द झील – यह झील जोधपुर के उत्तर में स्थित है तथा इसका पानी पीने के काम में आता है।

  • कोलायत झील – यह झील कोलायत में स्थित है जो बीकानेर से 47 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यहां कपिल मुनि का आश्रम है तथा हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मेला लगता है।

  • उदय सागर – यह उदयपुर से १३ किलोमीटर दूर स्थित है। इस झील का निर्माण उदयसिंह ने कराया था।
  • मानसरोवर झील - झालावाड़
  • बिसलसर झील - अजमेर 
  • कायलाना झील - जोधपुर 
  • भोपाल सागर झील - चित्तोडगढ़ 
  • गजनेर झील - बीकानेर
  • दूगारी झील - बूंदी 
  • पिथमपुर झील - सीकर 
  • काड़िया झील - झालावाड़ 
  • घडसिसर झील - जैसलमेर 
  • गैवसागर झील - डूंगरपुर 
  • तलवाड़ा झील - हनुमानगढ़ 
  • बूढ्हा जोहड - श्री गंगानगर 
  • बलसमंद झील - जोधपुर 

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