NCF 2009 । निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार 2009 - SSC EXAM LIVE

सोमवार, 27 जनवरी 2020

NCF 2009 । निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार 2009



निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार 2009


  • भारत में सर्वप्रथम निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कि कल्पना 1910 में गोपालकृष्ण गोखले द्वारा की गई एवं 1948 में डॉ. राधाकृष्णन द्वारा की गई।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, 1988, 1992 में भी शिक्षा अधिकार कि कल्पना की गई थी परन्तु व्यवहारिक रूप से इसे लागू नहीं किया जा सका तथा 1993 में प्रोफ़ेसर यशपाल शर्मा द्वारा तनाव एवं बोझ मुक्त शिक्षा समिति का गठन किया गया।
  • NCF 2005 में भी निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कि कल्पना की गई परन्तु इसे लागू नहीं किया जा सका।
  • 20 जुलाई 2009 को शिक्षा के अधिकार को राज्यसभा एवं 04 अगस्त 2009 को लोकसभा द्वारा इसे पारित कर दिया गया।
  • 26 अगस्त 2009 को भारतीय संसद द्वारा इसे पारित कर दिया गया। ( राष्ट्रपति - प्रतिभा पाटिल )
  • 27 अगस्त 2009 को सम्पूर्ण भारत में उद्घोषणा की गई।
  • 01 अप्रैल 2010 को जम्मु कश्मीर को छोड़ कर सम्पूर्ण भारत में इसे लागू कर दिया गया और इसे लागू करने वाला भारत देश विश्व का 135 वां देश बना एवं प्रथम - पर्शा एवं जॉर्डन थे।
  • शिक्षा के इस अधिकार में 7 अध्याय एवं 38 धाराओं का उल्लेख है।

अध्याय-1  प्रांरभिक


धारा- 1
नाम :- निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार- 2009
विस्तार :- जम्मू कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में
लागू :- 01 अप्रैल 2010

धारा- 2 उपधाराओं का उल्लेख ( क - म )
1. पिछड़े वर्ग के बालको की शिक्षा
2. अभाव ग्रस्त बालकों की शिक्षा - APL - BPL
3. विद्धालय के प्रकार- (4) सरकारी + निजी + अनुदानित + खास श्रेणी के बालक
4. बालक से आशय - 6 - 14 वर्ष। दिव्यांग 6 - 18 वर्ष
5. प्रांरभिक शिक्षा - 1 से 8 तक

अध्याय- 2 बालक का शिक्षा का अधिकार

धारा - 3 बालक का निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार एवं धारा 3 के तहत 6 से 14 वर्ष के बालक - बालिकाओं को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया।
धारा- 4 आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश
धारा- 5 TC मांगने पर TC प्रदान करना

अध्याय- 3  समूचित सरकार, स्थानीय प्राधिकारी और माता-पिता के कर्तव्य

धारा-6  नवीन विद्यालयो की स्थापना
धारा छः के तहत जिन क्षेत्रों में विद्धयालय नहीं है उन क्षेत्रों में 3 वर्षो के भीतर - प्रति 1 किमी में प्राथमिक एवं प्रति 3 किमी में उच्च प्राथमिक विद्द्यालय की स्थापना की जाएगी।
धारा - 7 वित्तीय प्रबंधन :- RTE 2009 कि धारा- 7 के तहत शिक्षा के इस अधिकार का संचालन करने हेतु खर्च होने वाली राशि केंद्र एवं राज्य द्वारा वहन की जाएगी जिसका आधार अनुपात 65 : 35 है एवं अनुशंशा अनुपात 60 : 4068 :32 है।
पूर्वोतर राज्यों में यह अनुपात 90 : 10 होगा।
धारा- 8 समुचित सरकार के कर्तव्य
धारा -8 के तहत केंद्र एवं राज्य में संचालित सरकार द्वारा शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जायेगा।
धारा - 9 स्थानीय प्राधिकारी के कर्तव्य
धारा - 9 के तहत केंद्र एवं राज्य सरकार  द्वारा संचालित योजनाओ स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन करने हेतु निम्न प्राधिकारियों की न्युक्ति।
 जैसे - केंद्र सरकार योजना एवं राज्य सरकार योजना -
राज्य स्तर- राज्य नोडल
RCSCE ( रा. रा. स्कूल शिक्षा परिषद् )
जिला स्तर - CDEO  ( मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी )
ब्लॉक स्तर -   CBEO - मुख्य खंड शिक्षा अधिकारी
पंचायत स्तर - PEEO - पंचायत प्राम्भिक शिक्षा अधिकारी
विधालय - HM -HEAD MASTER
धारा -10 माता - पिता के कर्तव्य
बालक अभिभावक अपने बालक बालिकाओं की प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करवाएंगे।

धारा -11  3 से 6 वर्ष के बालको की शिक्षा
धारा - 11 के तहत 3 से 6 वर्ष के बालक - बालिकाओं की शिक्षा की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाएंगी। ( आंगनवाड़ी द्वारा )

अध्याय - 4.  विद्धालय एवं शिक्षकों के कार्य कर्तव्य एवं अधिकार

धारा -12.   25 % पदों पर निःशुल्क प्रवेश
धारा - 12 के तहत प्रत्येक विधालय अपने विधालय कि प्राम्भिक कक्षा के 25 % पदों पर निःशुल्क प्रवेश प्रदान करेगा - ( अपने वार्ड के अनुसार )
धारा -13.  प्रवेश निःशुल्क न लेना
धारा 13 के तहत प्रवेश शुल्क लेने पर 25000 रूपये का जुर्माना देना होगा।
धारा-14 आयु प्रमाण - पत्र
किसी भी बालक को आयु प्रमाण पत्र के अभाव में विधालय में प्रवेश नहीं दिया जा सकता परन्तु प्रवेश से वंचित भी नहीं कर सकता इसके लिए 3 प्रारूप मान्य होंगे
(1). माता-पिता का शपथ पत्र
(2). अस्पताल की पर्ची
(3). आंगनबाड़ी का प्रमाण पत्र
धारा -15 - प्रवेश तिथि का विस्तारण
धारा - 15 के तहत प्रवेश तिथि का विस्तारण अधिकतम 6 माह किया जा सकता हैं।
धारा -16 कक्षा 1 - 8 तक फेल न करना
धारा -17 शारीरिक एवं मानसिक दण्ड न देना
धारा -18  विधालय की मान्यता
RTE - 2009 के धारा 18 के तहत किसी विधालय का संचालन बिना मान्यता के नहीं किया जा सकता
धारा -19 विधालय के मान व मानक 
1 (A) एक प्राथमिक विधालय में एक सप्ताह में शिक्षण के घण्टे = 45 ( तैयारी सहित )
(B) एक प्राथमिक विधालय में एक वर्ष में शिक्षण दिवस - 200 दिवस
(9) एक प्राथमिक विधालय में एक वर्ष में शिक्षण घण्टे - 800 ( तैयारी सहित )
2. (A) एक उच्च प्राथमिक विधालय में एक सप्ताह में शिक्षण के घण्टे = 48 ( तैयारी सहित )
(B) एक उच्च प्राथमिक विधालय में एक वर्ष में शिक्षण घण्टे = 1000 ( तैयारी सहित )
(C) एक उच्च प्राथमिक विधालय वर्ष में शिक्षण दिवस = 220 दिन

धारा- 20 अनुसूचित में परिवर्तन केंद्र सरकार द्वारा

धारा -21 विधालय प्रबंधक समिति (SMC)
RTE- 2009 की धारा 21 के तहत प्रत्येक विधालय का संचालन करने के लिए विधालय प्रबंधन समिति का गठन किया जायेगा।
इसके अभाव में विधालय का संचालन नहीं होगा।
राजस्थान में विधालय प्रबंधन समिति का संचालन 2011 से हुआ लेकिन इसकी घोषणा 2009 में की जा चुकी थी।
कक्षा 9 से 12 तक के विधालय में विधालय विकास एवं प्रबंधन समिति (SDMC)का गठन किया गया जिसका संचालन 1999 से किया जा रहा था।
वर्तमान में विधालय प्रबंधन समिति के सदस्यों की संख्या 16 है जो पूर्व में 15 थी।
SMC - 16 के सदस्य होते है जिनमें 11 अभिभावक होते है इनमे से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होता है।
एक सचिव - HM  ( पदेन )
2 प्रधान द्वारा नियुक्त ( एक वार्डपंच ) ( एक शिक्षाशास्त्री )
1 शिक्षक या शिक्षिका
1 प्रतिभाशाली बालक
कुल = 16 सदस्य
SMC की 2 समितियां होती है
(i) साधारण समिति -  इसमें सदस्य निश्चित नहीं होते है
कार्य - विधालय विकास योजना का निर्माण करना
(ii) कार्यकारी समिति - इसमें 16 सदस्य होते है तथा 1 माह में एक बार अमावस्या को बैठक होती है
कार्य - विधालय विकास योजना का क्रियान्वयन करना
 धारा -22 विधालय विकास योजना
धारा 22 के तहत विधालय विकास योजना का निर्माण SMC की साधारण समिति के द्वारा किया जाता है
धारा -23 शिक्षको की योग्यता एवं शर्ते
धारा -24 शिक्षको के कर्तव्य एवं शिकायतों का निवारण
धारा -25 शिक्षक - छात्र अनुपात
छात्रों की संख्या के आधार पर
छात्र : शिक्षक
30 : 01
31- 60 : 02
61 - 90 : 03
91 - 120 : 04
121 : 200 : 05 शिक्षक + एक HM ( हैड मास्टर )
विधालय के स्तर के आधार पर
1-5 = 1 : 30 PS ( प्राथमिक स्कूल )
1 -8 = 1 : 40 UPS ( उच्च प्राथमिक स्कूल )
6 - 8 = 1 : 35 UPS
SSA( सर्व शिक्षा अभियान ) - 1 : 40
RMSA ( राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान ) = 1 : 40
मॉडल स्कूल में अनुपात = 1 : 40
आदर्श स्कूल में अनुपात = 1 : 40
NOTE :- 200 से छात्र संख्या अधिक होने पर प्रति 40 बालकों पर एक अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी।
धारा -26 रिक्त पदों को भरना
धारा 26 के तहत विधालय में स्वीकृत पदों में से रिक्त पड़े हुए पदों को 3 वर्ष के भीतर भरा जायेगा।
अधिकतम 10 % पद ही रिक्त रह सकते है।
धारा -27 गैर शैक्षणिक कार्यों  में शिक्षको की नियुक्ति नहीं
धारा 27 के तहत किसी भी शिक्षक की नियुक्ति गैर शैक्षिक कार्यों में नहीं की जाएगी
परन्तु चुनावी कार्य, जनगणना, राष्ट्रीय आपदा जैसे कार्यो में शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी।
धारा -28 निजी टूशन पर रोक

अध्याय 5 प्रारम्भिक शिक्षा एवं पाठ्यक्रम

धारा- 29 प्रारम्भिक शिक्षा पाठ्यक्रम का निर्माण एवं सतत समग्र व्यापक मूल्यांकन ( CCE )
धारा 29 के तहत राजस्थान में कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम  का निर्माण किया जाता है.
SIERT ( राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् उदयपुर ) को वर्मन में RSCERT (राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् ) के नाम से जाना जाता है।
SIERT उदयपुर में स्थित है जिसके द्वारा पूर्व में कक्षा एक से आठ तक पाठ्यक्रम का ही निर्माण किया जाता था।
धारा -30 प्रमाण पत्र प्रधान करना

अध्याय - 6 शिक्षा अधिकार का संरक्षण

धारा -31 बालक के शिक्षा अधिकार की मॉनीटरिंग
धारा -32 राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् का गठन
धारा -34 राज्य सलाहकार परिषद् का गठन

अध्याय - 7 प्रकीर्णन = विस्तार

धारा -35 शेक्षणिक योजना निर्माण केंद्र द्वारा
धारा -36 दण्ड से पूर्व सक्षम अधिकारी की अनुमति
धारा -37 दंड के विरुद्ध न्यायालय में परिषद् प्रस्तुत न करना
धारा -38 राज्यों द्वारा केंद्र की योजनाओ का क्रियान्वयन
राजस्थान में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार का ;संचालन RTE - 2009 की धारा 3538 के तहत 29 मार्च 2011 को किया गया।
इसमें 29 धाराओं एवं 10 अध्यायों का उल्लेख है।
RTE - 2009 भारत में समावेशी शिक्षा का आधार है।
RTE - 2009 की सबसे बड़ी कमी यह है की इसमें 14 वर्ष के पश्चात् की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया।



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