बाघों की जनगणना रिपोर्ट 2018 | - SSC EXAM LIVE

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

बाघों की जनगणना रिपोर्ट 2018 |

बाघों की जनगणना रिपोर्ट 2018


विश्‍व बाघ दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने नई दिल्‍ली में बाघों के अखिल भारतीय अनुमान-2018 के चौथे चक्र के परिणाम जारी किए। सर्वेक्षण के अनुसार 2018 में भारत में बाघों की संख्‍या बढ़कर 2967 हो गई। इससे पहले सेंसस 2014 में देश में बाघों की संख्या 2226 सामने आई थी।प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 3000 बाघों के साथ, भारत आज सबसे बड़ा और सुरक्षित प्राकृतिक वास हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के लिए कार्य की गति तेज हुई है, देश में वन क्षेत्र भी बढ़ा है। ‘संरक्षित क्षेत्रों’ में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2014 में 692 संरक्षित क्षेत्र थे, जिनकी संख्‍या 2019 में बढ़कर 860 से अधिक हो गई है। ‘सामुदायिक शरणस्‍थलों’ की संख्‍या भी बढ़कर 100 हो गई है, जो 2014 में केवल 43 थी। बाघों की संख्‍या में 33 प्रतिशत की वृद्धि विभिन्‍न चक्रों के बीच दर्ज अब तक की सबसे अधिक है, जो 2006 से 2010 के बीच 21 प्रतिशत और 2010 और 2014 के बीच 30 प्रतिशत थी। बाघों की संख्‍या में वृद्धि 2006 से बाघों की औसत वार्षिक वृद्धि दर के अनुरूप है। मध्‍य प्रदेश में बाघों की संख्‍या सबसे अधिक 526 पाई गई, इसके बाद कर्नाटक में 524 और उत्‍तराखंड में इनकी संख्‍या 442 थी। यह देश के लिए गौरव का क्षण है कि उसने बाघों की संख्‍या दोगुनी करने की सेंट पीटर्सबर्ग घोषणापत्र की प्रतिबद्धता को 2022 की समय सीमा से पहले ही हासिल कर लिया है। छत्‍तीसगढ़ और मिजोरम में बाघों की संख्‍या में गिरावट देखने को मिली, जबकि ओडिशा में इनकी संख्‍या अपरिवर्तनशील रही। अन्‍य सभी राज्‍यों में सकारात्‍मक प्रवृत्ति देखने को मिली। बाघों के सभी पांच प्राकृतिक वासों में उनकी संख्‍या में बढ़ोतरी देखने को मिली। चौथे चक्र के दौरान सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के साथ, एक एन्‍ड्रॉयड आधारित एप्‍लीकेशन-एम-एसटीआरआईपीईएस (मॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स) का इस्‍तेमाल करते हुए आंकड़े एकत्र किए गए और एप्‍लीकेशन के डेस्‍कटॉप मॉडयूल पर इनका विश्‍लेषण किया गया। प्रधानमंत्री ने पेंच बाघ अभयारण्‍य, मध्‍य प्रदेश के साथ बाघ अभयारण्‍यों के प्रभावी मूल्‍यांकन प्रबंध (एमईईटीआर) के चौथे चक्र की भी रिपोर्ट जारी की, जहां बाघों की संख्‍या सबसे अधिक देखने को मिली, जबकि तमिलनाडु स्थित सत्‍यमंगलम बाघ अभयारण्‍य में पिछले चक्र के बाद से सबसे अच्‍छा प्रबंध देखने को मिला, जिसके लिए उसे पुरस्‍कृत किया गया। बाघ अभयारण्‍यों के 42 प्रतिशत बहुत अच्‍छी प्रबंधन श्रेणी में हैं, जबकि 34 प्रतिशत अच्‍छी श्रेणी में, 24 प्रतिशत मध्‍यम श्रेणी में हैं। किसी भी बाघ अभयारण्‍य को खराब रेटिंग नहीं दी गई है। देश में बाघों के संरक्षण की यह मुहिम 2006 से शुरू हुई। देश में 2010 में 1706, 2014 में 2226 बाघ पाए गए थे।

भारत अपने यहां बाघों की संख्‍या का आकलन करने के लिए मार्क-रीकैप्‍चर फ्रेमवर्क को शामिल कर दोहरे प्रतिचयन दृष्टिकोण का इस्‍तेमाल करता रहा है, जिसमें विज्ञान की तरक्‍की के साथ समय- समय पर सुधार हुआ है।

चौथे चक्र के दौरान सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के साथ, एक एन्‍ड्रॉयड आधारित एप्‍लीकेशन-एम-एसटीआरआईपीईएस (मॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स) का इस्‍तेमाल करते हुए आंकड़े एकत्र किए गए और एप्‍लीकेशन के डेस्‍कटॉप मॉडयूल पर इनका विश्‍लेषण किया गया। इस एप्‍लीकेशन ने करीब 15 महीने में भारी मात्रा में एकत्र किए गए आंकड़ों का विश्‍लेषण आसान बना दिया। इस दौरान राज्‍य के वन अधिकारियों ने 52,2,996 किलोमीटर पैदल चलकर वनों में स्थित बाघों के प्राकृतिक वास के 3,81,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया। इसमें 3,17,958 प्राकृतिक वास भूखंड थे, जिनमें 5,93,882 मानव दिवस का कुल मानव निवेश किया गया। इसके अलावा 26,760 स्‍थानों पर कैमरे लगाए गए, जिन्‍होंने वन्‍य जीवों की 35 मिलियन तस्‍वीरें दीं, जिनमें 76,523 तस्‍वीरें बाघों की थीं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का इस्‍तेमाल करने के कारण थोड़े ही समय में इन चित्रों को अलग करना संभव हुआ।

जिस तेजी से यह कार्य किया गया, उसके परिणामस्‍वरूप बाघों की 83 प्रतिशत आबादी को ग्रहण कर लिया गया, जबकि 2,461 बाघों के चित्र प्राप्‍त किए गए और बाघों की केवल 17 प्रतिशत आबादी के बारे में अनुमान लगाया गया कि वह मजबूत स्‍थान पर है।

बाघ अभयारण्‍यों के आर्थिक मूल्‍यांकन पर जारी रिपोर्ट में बाघ अभयारण्‍य को विकास का इंजन बताया है। इसका प्रकाशन एनटीसीए और भारतीय वन प्रबंधन संस्‍थान, भोपाल ने संयुक्‍त रूप से किया है। प्रधानमंत्री ने ‘बाघों की गणना’ विषय पर वृतचित्र का ट्रेलर भी जारी किया, जिसे दुनिया भर में 7 अगस्‍त को दिखाया जाएगा।

Tiger Census Report 2018


On the occasion of World Tiger Day, Prime Minister Narendra Modi released the results of the fourth round of the All India Estimates of Tigers-2018 in New Delhi. According to the survey, the number of tigers in India increased to 2967 in 2018. Earlier the census revealed 2226 tigers in the country in 2014. The Prime Minister said that with around 3000 tigers, India has become the largest and safest habitat today. The Prime Minister said that in the last five years, the pace of work for the next generation of infrastructure has increased, the forest area in the country has also increased. 'Protected areas' have also increased. There were 692 protected areas in the year 2014, the number of which has increased to more than 860 in 2019. The number of 'community shelters' has also risen to 100, from just 43 in 2014. The 33 percent increase in tiger population is the highest ever recorded among various cycles, up from 21 percent between 2006 and 2010 and 30 percent between 2010 and 2014. The increase in tiger population is in line with the average annual growth rate of tigers since 2006. Madhya Pradesh has the highest tiger population of 526, followed by 524 in Karnataka and 442 in Uttarakhand. It is a moment of pride for the country that it has already achieved the St Petersburg manifesto's commitment to double the tiger population before the 2022 deadline. Chhattisgarh and Mizoram saw a decline in the number of tigers, while their numbers remained unchanged in Odisha. All other states saw a positive trend. All five natural habitats of tigers have seen an increase in their numbers. During the fourth cycle, along with the Government's Digital India initiative, data was collected and analyzed on the application's desktop module using an Android-based application - M-STRIPES (Monitoring System for Tigers Intensive Protection and Ecological States). The Prime Minister also released the report of the fourth cycle of Effective Evaluation Management (MEETR) of Tiger Sanctuaries along with Pench Tiger Sanctuary, Madhya Pradesh, where tiger population is highest, while Tamil Nadu-based Satyamangalam Tiger Sanctuary has since the last cycle. The best management was seen, for which he was awarded. 42 percent of tiger reserves are in very good management category, while 34 percent are in good category, 24 percent in the middle category. No tiger reserve is rated poorly. This campaign to conserve tigers in the country started in 2006. 1706 in 2010, 2226 tigers were found in 2014 in the country.

India has been using a double sampling approach by incorporating a mark-recapture framework to assess the number of tigers here, which has improved over time with the advancement of science.

During the fourth cycle, along with the Government's Digital India initiative, data was collected and analyzed on the application's desktop module using an Android-based application - M-STRIPES (Monitoring System for Tigers Intensive Protection and Ecological States). This application made it easy to analyze data collected in huge amounts in about 15 months. During this period, the state forest officials walked 52,2,996 km and surveyed an area of ​​3,81,400 square kilometers of tiger habitat. There were 3,17,958 natural habitat plots, with a total human investment of 5,93,882 man-days. In addition, cameras were installed at 26,760 places, which gave 35 million pictures of wildlife, of which 76,523 were of tigers. Due to the use of artificial intelligence software, it was possible to separate these images in a short time.

The rapid pace in which this was done resulted in 83 per cent of the tiger population, while images of 2,461 tigers were obtained and only 17 per cent of the tiger population is estimated to be in a strong position.

In the report released on the economic assessment of tiger reserves, tiger reserve has been described as the engine of development. It is published jointly by NTCA and Indian Forest Management Institute, Bhopal. The Prime Minister also released a documentary documentary on the subject of 'Census of Tigers', which will be shown worldwide on 7 August.

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें