जम्मू-कश्मीर में परिसीमन | - SSC EXAM LIVE

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन |


जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने और राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर इलाके के परिसीमन की कवायद शुरु कर दी है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून की धारा-60 के तहत जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 की जाएगी।जम्मू-कश्मीर में परिसीमन होते ही विधानसभा सीटों की संख्या में बदलाव होगा और यहां की विधानसभा क्षेत्रों का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आज तक कश्मीर का ही पलड़ा भारी रहा है, क्योंकि विधानसभा में कश्मीर की विधानसभा सीटें, जम्मू के मुकाबले ज्यादा रही हैं, लेकिन अब परिसीमन होने से जम्मू की विधानसभा सीटें बढ़ सकती है।

मौजूदा स्थिति में जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में कुल 87 सीटों पर चुनाव होता है। जिसमें 87 सीटों में से घाटी में 46, जम्मू में 37 और लद्दाख में 4 विधानसभा सीटें हैं। परिसीमन में सीटों के बदलाव में आबादी और वोटरों की संख्या का भी ध्यान रखा जाता है।


हाल ही में केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 को सदन में पास करवाया था। सरकार ने अनुच्छेद 370 (3) के अंतर्गत प्रदत्त कानूनों को खत्म करते हुए जम्मू-कश्मीर पुर्नगठन 2019 विधेयक को पेश किया था। इस विधेयक के मुताबिक जम्मू कश्मीर को अब केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा होगा। लद्दाख बगैर विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश होगा।

अभी जम्मू-कश्मीर में कुल 111 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से 87 जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की हैं। बाकी 24 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लिए खाली रखी जाती हैं। अब नए परिसीमन के तहत लद्दाख के खाते की 4 सीटें हट जाएंगी, क्योंकि वहां पर विधानसभा नहीं रहेगी।परिसीमन का अर्थ

परिसीमन से तात्पर्य किसी भी राज्य की लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं (राजनीतिक) का रेखांकन है। अर्थात इसके माध्यम से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमायें तय की जाती हैं। आसान शब्दों में परिसीमन की मदद से यह तय होता है कि किस क्षेत्र के लोग किस विधान सभा या लोक सभा के लिए वोट डालेंगे?
भारत में परिसीमन का इतिहास

भारत में सर्वप्रथम वर्ष 1952 में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था। इसके बाद 1963,1973 और 2002 में परिसीमन आयोग गठित किए जा चुके हैं। भारत में वर्ष 2002 के बाद परिसीमन आयोग का गठन नहीं हुआ है।

भारत के उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में 12 जुलाई 2002 को परिसीमन आयोग का गठन किया गया था।

आयोग ने सिफारिसों को 2007 में केंद्र को सौंपा था लेकिन इसकी सिफारिसों को केंद्र सरकार ने अनसुना कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दखल देने के बाद इसे 2008 से लागू किया गया था। आयोग ने वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया था।
परिसीमन किस आधार पर निर्धारित किया जाता है?

परिसीमन के निर्धारण में 5 फैक्टर्स को ध्यान में रखा जाता है, ये हैं;
क्षेत्रफल
जनसंख्या
क्षेत्र की प्रकृति
संचार सुविधा
अन्य कारण
जम्मू कश्मीर में परिसीमन की जरुरत

2011 की जनगणना के मुताबिक जम्मू संभाग की जनसँख्या लगभग 54 लाख है, जो कि राज्य की 43% आबादी है। जम्मू संभाग 26,200 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है यानी राज्य का लगभग 26% क्षेत्रफल जम्मू संभाग के अंतर्गत आता है जबकि यहां विधानसभा की कुल 37 सीटें हैं।

कश्मीर संभाग की जनसँख्या 68.88 लाख है, जो राज्य की जनसँख्या का 55% हिस्सा है। कश्मीर संभाग का क्षेत्रफल राज्य के क्षेत्रफल लगभग 16% प्रतिशत है जबकि इस क्षेत्र से कुल 46 विधायक चुने जाते हैं।ज्ञातव्य है कि कश्मीर में 349 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर एक विधानसभा है, जबकि जम्मू में 710 वर्ग किलोमीटर पर।



राज्य के 58.33% क्षेत्रफल वाले लद्दाख संभाग में केवल 4 विधानसभा सीटें हैं।

ऊपर के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि राज्य में जनसँख्या और क्षेत्रफल के आधार पर सीटों का बंटवारा असंतुलित है।


After the removal of Article 370 from Jammu and Kashmir and making the state a union territory, the Election Commission has started the exercise of delimitation of Jammu and Kashmir area. Under Section 60 of the Jammu and Kashmir Reorganization Act, the number of assembly seats in Jammu and Kashmir Union Territory will be increased from 107 to 114. With the delimitation in Jammu and Kashmir, the number of assembly seats will change and the map of the constituencies here Will change completely.

In Jammu and Kashmir politics till date, Kashmir itself has been heavy, because the assembly seats in Kashmir have been higher than in Jammu, but now due to delimitation, the assembly seats of Jammu can increase.

In the current situation, a total of 87 seats are elected in the assembly of Jammu and Kashmir. Out of which 87 seats are in the Valley 46, Jammu has 37 and Ladakh has 4 Assembly seats. In the delimitation, change of seats also takes into account the population and the number of voters.

Recently, the Central Government had passed the Jammu and Kashmir Reorganization Bill 2019 in the House. The government introduced the Jammu and Kashmir Reorganization 2019 Bill, abolishing the laws provided under Article 370 (3). According to this bill, Jammu and Kashmir will now have the status of a union territory. Ladakh will be a union territory without assembly.


At present, there are 111 assembly constituencies in Jammu and Kashmir, out of which 87 are from Jammu and Kashmir and Ladakh. The remaining 24 are kept vacant for Pakistan Occupied Kashmir. Now under the new delimitation, 4 seats of Ladakh's account will be removed, because there will be no assembly there.

Delimitation refers to the delineation (political) of the Lok Sabha and assembly constituencies of any state. That is, through it the boundaries of the Lok Sabha and Assembly constituencies are decided. With the help of delimitation in easy words, it is decided that people of which region will vote for which Vidhan Sabha or Lok Sabha?
History of delimitation in india

The Delimitation Commission was first formed in India in the year 1952. After this, the Delimitation Commissions have been set up in 1963,1973 and 2002. Delimitation Commission has not been formed in India after 2002.

The Delimitation Commission was constituted on 12 July 2002 under the chairmanship of Justice Kuldeep Singh, a retired judge of the Supreme Court of India.

The Commission had handed over the recommendations to the Center in 2007 but its recommendations were unheard of by the Central Government but were implemented from 2008 after the Supreme Court intervened. The commission delimited the constituencies on the basis of the 2001 census.
On what basis is the delimitation determined?

5 factors are taken into consideration in determining the delimitation, these are;
Area
Population
Nature of the area
Communication facility
other reason
Need for delimitation in Jammu and Kashmir

According to the 2011 census, Jammu division has a population of about 54 lakhs, which is 43% of the state's population. The Jammu division is spread over 26,200 square kilometers, that is, about 26% of the area of ​​the state comes under the Jammu division while there are a total of 37 assembly seats.

The population of Kashmir division is 68.88 lakh, which is 55% of the state's population. The area of ​​Kashmir division is about 16% percent of the area of ​​the state, while a total of 46 MLAs are elected from this region. It is noteworthy that there is an assembly in Kashmir on 349 square kilometers, while in Jammu on 710 square kilometers.



Ladakh division with 58.33% area of ​​the state has only 4 assembly seats.

The above figures make it clear that the distribution of seats on the basis of population and area in the state is unbalanced.



कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें