जानें क्या होता है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ - SSC EXAM LIVE

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

जानें क्या होता है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ



भारत में सैन्य सुधार के लिहाज से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति का एलान एक बड़ा कदम है। जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसका एलान किया है तब से इस पद को लेकर देश में दिलचस्पी बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि सेना के तीनों अंगों में तालमेल बढ़ाने के लिए इस पद की जरूरत है, ताकि संकट की स्थिति में एकीकृत निर्णय लेने में आसानी हो। युद्ध अथवा किसी अन्य टकराव की स्थिति में सीडीएस की भूमिका बेहद अहम होगी। तमाम देश ऐसे हैं जिनके पास आधुनिक सेनाएं हैं और उन्होंने इस पद का गठन कर रखा है। हालांकि, इन देशों में सीडीएस के अधिकारों और शक्तियों में अंतर है। उदाहरण के लिए अमेरिका में ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का चेयरमैन अधिकारों के मामले में बेहद संपन्न है। वह सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी है और राष्ट्रपति को सैन्य मामलों में सलाह देता है।
भारत में क्या स्थिति रही है?

इस पद के गठन को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चलती रही हैं। एक पद पहले से है-चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी)। यह पद काफी कुछ सीडीएस जैसा ही है, लेकिन अधिकारों के लिहाज से इसका ज्यादा मतलब नहीं है। अभी तक परंपरा रही है कि थलसेना, वायुसेना, नौसेना प्रमुखों में जो सबसे अधिक वरिष्ठ होता है उसे सीओएससी बना दिया जाता है। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति जब रिटायर हो जाता है तो यह पद स्वत: समाप्त हो जाता है। इस समय चेयरमैन सीओएससी के पद पर वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ हैं। उन्होंने 31 मई को नौसेना प्रमुख सुनील लांबा की सेवानिवृत्ति के बाद यह पद धारण किया है। धनोआ को सितंबर 2019 तक वायुसेना प्रमुख के पद पर रहना है। इसका मतलब है कि वह चेयरमैन सीओएससी के पद पर केवल चार माह रह सकेंगे। 2015 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर र्पीकर ने इस पद को असंतोषजनक बताया था। सीओएससी सिस्टम दरअसल उपनिवेश काल की विरासत है। कहा जाता है कि भारत में राजनीतिक वर्ग के बीच सीडीएस को लेकर एक आशंका यह रही है कि ऐसे किसी पद का गठन नहीं किया जाना चाहिए, जिसके अत्यधिक शक्तिशाली हो जाने का खतरा हो।

सीडीएस के लिए पहला प्रस्ताव कारगिल रिव्यू कमेटी (2000) में आया था। कमेटी ने पूरे सैन्य तंत्र में सुधार के लिए सुझाव दिए थे। इसके बाद मंत्रियों के एक समूह ने भी सीडीएस के विचार का अध्ययन किया। समूह ने सुझाव दिया कि फाइव स्टार रैंक के इस पद का गठन किया जाना चाहिए। इस आशय का प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी आन सिक्योरिटी (सीसीएस) को दिया गया। प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका : सीडीएस के प्रस्ताव पर सेनाओं के बीच कोई आम सहमति कायम नहीं हो सकी।

अभी जो ढांचा है उसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अहम मामलों में प्रधानमंत्री को सलाह देते हैं। यह सिलसिला 2018 के बाद से ही चल रहा है, जब डिफेंस प्लानिंग कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी की अध्यक्षता एनएसए करते हैं। मौजूदा समय अजीत डोभाल इस भूमिका में हैं। समिति में विदेश, रक्षा और वित्त सचिव शामिल होते हैं। इसके साथ ही तीनों सेनाओं के प्रमुख भी इसके सदस्य हैं।

The announcement of the appointment of the Chief of Defense Staff (CDS) is a major step in terms of military reform in India. Ever since Prime Minister Narendra Modi announced it on the occasion of Independence Day, interest in the country has increased since then. It is being said that this post is needed to increase coordination among the three organs of the army, so that it is easier to take integrated decisions in the event of a crisis. In the event of war or any other conflict, CDS will play an important role. There are many countries which have modern armies and they have formed this post. However, there are differences in the rights and powers of CDS in these countries. For example, the chairman of the Joint Chiefs of Staff Committee in the US is very rich in rights. He is the most senior military officer and advises the President on military matters.
What is the situation in India?

Discussions have been going on for a long time about the formation of this post. There is a post already - Chairman, Chiefs of Staff Committee (COSC). This post is very similar to CDS, but does not mean much in terms of rights. As of now it has been a tradition that the senior most among the Army, Air Force and Navy Chiefs is made COSCs. When the person appointed to this post retires, the post automatically ends. At present, Air Force Chief BS Dhanoa is the Chairman of COSC. He held the post after the retirement of Navy Chief Sunil Lamba on 31 May. Dhanoa is to hold the post of Chief of Air Force till September 2019. This means that he will be able to remain in the post of chairman COSC for only four months. In 2015, the then Defense Minister Manohar Pipkar described the post as unsatisfactory. The COSC system is a legacy of the colonial era. It is said that there has been a fear among the political class in India about the CDS, that no such post should be formed, which is in danger of becoming too powerful.

The first proposal for CDS came in the Kargil Review Committee (2000). The committee had made suggestions to improve the entire military system. Subsequently, a group of ministers also studied the idea of ​​CDS. The group suggested that this rank of five star rank should be formed. A proposal to this effect was made to the Cabinet Committee on Security (CCS). The proposal could not proceed: No consensus could be reached between the armies on the CDS proposal.

The National Security Advisor (NSA) currently advises the Prime Minister on important matters in the framework. This trend has been going on since 2018, when the Defense Planning Committee was formed. The NSA is headed by this committee. Currently Ajith Doval is in this role. The Committee consists of the Secretary of Foreign, Defense and Finance. Along with this, the heads of the three armies are also its members.

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