दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन(SAARC) - SSC EXAM LIVE

सोमवार, 10 सितंबर 2018

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन(SAARC)


दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है।यह किसी भी क्षेत्रीय संगठन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है। इसकी स्थापना December 8, 1985 को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान द्वारा मिलकर की गई थी।

अप्रैल 2007 में संघ के 14 वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवा सदस्य बन गया।
गठन



1970 के दशक में बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने दक्षिण एशियाई देशों के एक व्यापार गुट के सृजन का प्रस्ताव किया। मई 1980 में दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग का विचार फिर रखा गया था। अप्रैल 1981 में सातों देश के विदेश सचिव कोलंबो में पहली बार मिले। इनकी समिति ने क्षेत्रीय सहयोग के लिए पाँच व्यापक क्षेत्रों की पहचान की।सार्क का मुख्य उद्देश्य मानव संसाधन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कृषि के क्षेत्र का विकास करना है और साथ ही जनसंख्या और स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों और परिवहन सुविधाओं के सुधार का समाधान करना है।

13 November 2005 को भारत के प्रयास से इस क्षेत्रीय समूह में अफ़ग़ानिस्तान को शामिल किया गया और April 3, 2007 को आठवां सदस्य बन गया। अप्रैल 2006 में, संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किए जाने का औपचारिक अनुरोध किया। यूरोपीय संघ में भी पर्यवेक्षक बनने में दिलचस्पी दिखाई और जुलाई 2006 में सार्क मंत्रिपरिषद की बैठक में इस बाबत औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत किया। 2 August 2006 को सार्क देशों के विदेश मंत्रियों ने सिद्धांत रूप में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ को पर्यवेक्षक का दर्जा देने के लिए सहमत हुए। March 4, 2007, ईरान ने पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किए जाने अनुरोध किया। इसके बाद मॉरीशस ने संगठन में प्रवेश किया।
महत्त्वपूर्ण जानकारी
सार्क का मुख्‍यालय काठमांडू में है।
सार्क दिवस प्रत्‍येक वर्ष 8 दिसम्बर को मनाया जाता है।
सार्क का प्रथन सम्‍मेलन ढाका मेंं दिसम्‍बर 1985 में हुआ था
संगठन का संचालन सदस्य देशों के मंत्रिपरिषद द्वारा नियुक्त महासचिव करते हैं, जिसकी नियुक्ति तीन साल के लिए देशों के वर्णमाला क्रम के अनुसार की जाती है।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग पर इस घोषणा को 1983 में नई दिल्ली में विदेश मंत्रियों द्वारा अपनाया गया था।

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