आईएनएस कोच्ची जहाज का नाम कोच्ची क्यों पड़ा है? - SSC EXAM LIVE

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

आईएनएस कोच्ची जहाज का नाम कोच्ची क्यों पड़ा है?


भारतीय नौसेना के बेड़े में अब आईएनएस कोच्ची के आने से एक और बड़ी ताकत जुड़ गई है। भारत में ही बने युद्धपोत आईएनएस कोच्चि को नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है। 4,000 करोड़ रुपये की लागत से बना स्वदेश निर्मित इस युद्धपोत आईएनएस कोच्चि का बुधवार(30 सितम्बर 2015) को भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने नौसैनिक डॉकयार्ड में जलावतरण किया.



आईएनएस कोच्चि कोलकाता श्रेणी (परियोजना 15ए) के गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रोयर्स में दूसरा युद्धपोत है.

इसे नौसेना के आंतरिक संगठन नौसैनिक डिजाइन निदेशालय ने डिजाइन किया है और मुंबई में मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड में इसका निर्माण किया गया है. बंदरगाह शहर कोच्चि के नाम पर इसका नामकरण किया गया है. यह युद्धपोत दिल्ली श्रेणी के जहाजों की तुलना में बेहतर है

विशालकाय जहाज 164 मीटर लंबा और 17 मीटर गहरा है जो चार गैस टर्बाइन से चलता है. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि 30 नॉट तक की रफ्तार पकड़ सकता है. जहाज पर करीब 40 अधिकारी और चालक दल के 350 सदस्य सवार होंगे। कर्मचारियों की परिस्थिति और रहने की अनुकूल शैली के अनुरूप जहाज में रहने की व्यवस्था की गई है.यह युद्धपोत 3300 समुद्री मील क्षेत्र की गश्त करने में सक्षम

ब्रम्होस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, लंबी दूरी वाला समुद्र की सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम, 76 मिमी व 30 मिमी की गन और एंटी सब टारपीडो और राकेट जैसे हथियारों से लैस है.164 मीटर लंबा और 18 मीटर चौड़ा आईएनएस कोच्चि एक पांच मंजिला इमारत के बराबर है। इसका वजन 7500 टन का है। कोलकाता सीरीज का युद्धपोत आईएनएस कोच्चि में पहली बार थ्री डी रडार का इस्तेमाल किया गया है साथ ही इसमें सबमरीन डिटेक्टर और चार टॉरपीडो भी मौजूद हैं।

आईएनएस कोच्चि को नौसेना में शामिल करने की घोषणा करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने इस युद्धपोत को "विदेशी जहाजों जितना बेहतर" बताया।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें